Breaking News

गंगा नदी खतरे के निशान के ऊपर, पटना में बाढ़ का खतरा बिहार में बाढ़- 4 किमी नांव की डोली बना अपनी दुल्हन लेने पहुंचा लड़का चिराग को छोड़कर गए लोगों का नहीं है कोई जनाधार- कांग्रेस सुशांत मामले को लेकर राजद नेता तेजस्वी यादव का बयान, राजगीर मेंं बनने वाली फिल्म सिटी का नाम हो सुश बिहार में बाढ़ से 22 जिलों की हालत बदहाल, 82 लाख लोग हुए हैं प्रभावित सुशांत सिंह मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, सीबीआई करेगी मामले की जांच नीतीश कुमार ने दिया शिक्षकों को तोहफा, पूरे बिहार में कहीं भी ले सकते हैं तबादला नीतीश सरकार ने नियोजित शिक्षकों की नई सेवा शर्त लागू कर खेला 'मास्टर स्ट्रॉक' MenstrualHygieneDay पर जागरूकता के लिए उठाए जा रहे कदम, पर कम नहीं आलोचनाओं का जोर जद (यू0)- दलित-महादलित प्रकोष्ठ की राज्य कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक गया में युवती से बलात्कार के बाद हत्या नियोजित शिक्षकों ने कहा जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं तो आंदोलन आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका का हड़ताल काफी दुखद- कृष्ण नंदन वर्मा मोतिहारी- २०१९ की चुनाव तैयारी में जुटा जिला प्रशासन रामगढ़- पतरातू डैम परिसर में अवैध पार्किंग टिकट के नाम पे वसूली


स्वाधीनता प्राप्ति के बाद की भारत की यात्रा

By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date:17:58:38 PM / Fri, Aug 12th, 2016 |


स्वाधीनता प्राप्ति के बाद की भारत की यात्रा गौरवशाली उपलब्धियों की गाथा है। हालांकि यह भी सत्य है कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन की चुनौतियों सहित कई गंभीर चुनौतियों से अब तक निपटा नहीं जा सका है। देश ने लम्बे संघर्ष के बाद स्वाधीनता प्राप्त की थी और इस संघर्ष में सभी जातियों और धर्मों के असंख्य लोगों ने बलिदान दिया था। उपनिवेशी हुक्मरान भारत का खजाना लूटकर, उसकी सांस्कृतिक अस्मिता को मिटाकर और मैकॉले की शिक्षा नीति के माध्यम से उसके नैतिक बल को कमजोर करते हुए,  उसे नष्ट और अशक्त बनाना चाहते थे। इसलिए वे आक्रामक रुख अपनाते हुए शिक्षा के विस्तृत नेटवर्क की उस गौरवशाली विरासत को विकृत और नष्ट करते गये, जिसे उन्होंने उस राष्ट्र से विरासत में पाया था, जिसने उस समय विश्व को वैदिक दर्शन का पाठ पढ़ाया था, जब वह अंधेरे में भटक रहा था।

ब्रिटिश लोगों ने विरासत में क्या पाया था, इसका नमूना हैरान कर देने वाला है। 1 जुलाई, 1836 में जिला कलेक्टरों की प्रथम सर्वेक्षण रिपोर्ट में बंगाल-बिहार में बड़ी संख्या में- 100,000 स्कूल होने का उल्लेख किया गया। इसी तरह मद्रास पे्रसिडेंसी के 21जिलों के कलेक्टरों के अनुसार, प्रेसिडेंसी में 11,575  विद्वान, 1, 57,195 छात्र और उच्च शिक्षा के 1094 संस्थान थे। उन्होंने महसूस किया कि भारत को नैतिक और भौतिक रूप से पराधीन बनाने और उसके गर्व एवं विश्वास को नष्ट करने के काम को अंजाम देने के लिए यहां के ज्ञान की परम्परा को नष्ट करना होगा। 20 अक्टूबर 1931 को लंदन में रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में अपने संबोधन में महात्मा गांधी ने इसे ‘खूबसूरत वृक्ष की बर्बादी’ करार दिया।

लेकिन ब्रिटिश हुक्मरान भारत की आत्मा पर कभी विजय न पा सके, जैसा कि साहसी स्वाधीनता सेनानियों के विरोध तथा उनका साथ देने वाले उन लाखों लोगों से जाहिर होता है, जिन्होंने दौलत और ताकत के लालच को अस्वीकार कर गरीबी और तकलीफों को गले लगाया। एक दिलचस्प किस्से के माध्यम से इसे स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। जब इलाहाबाद से छपने वाले स्वराज्य अखबार ने अपने संपादक के पद के लिए विज्ञापन दिया और प्रत्येक संपादकीय के लिए एक गिलास पानी, दो रोटियां और 10 साल के सश्रम कारावास को प्रोत्साहन के रूप में दर्शाया, तो राष्ट्र की सेवा को तत्पर बड़ी तादाद में उम्मीदवार उसके कार्यालय में आ जुटे।

स्वाधीनता के बाद भी यही भावना बरकरार रही। जब भी बाहरी या आंतरिक चुनौतियों का सामना करने की नौबत आयी, भारत चट्टान की तरह मजबूती से खड़ा रहा और उसने अपने लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने के साथ ही साथ विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल कीं। ऐसी अबाधित प्रगति के मार्ग की रचना निस्संदेह हमारे संविधान निर्माताओं ने की थी। संविधान सभा में हुई चर्चाओं से पता चलता है कि संविधान निर्माता विचारशील प्रजातंत्रवादी थे, जो यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि लोकतंत्र भारतीय समाज की विविधताओं का समावेशन करे और उसके सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक जीवन के विरोधाभासों का समाधान करे। उनके प्रयासों की सफलता की छाप देश की राजनीतिक गतिविधियों में परिलक्षित होती है। वर्ष1952 में प्रथम आम चुनावों में जहां 54 राजनीतिक दलों ने भाग लिया था, वहीं 2014 के लोकसभा चुनावों में उनकी संख्या बढक़र464 हो गयी। भारत गर्व से इस बात का दावा कर सकता है कि निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से सबसे निचले स्तर (ग्राम सभा) से लेकर शीर्षतम स्तर (लोकसभा) तक, लोकतांत्रिक रूप से सत्ता का सहज हस्तांतरण होता है। लोकतंत्र के विस्तार के तीन आयाम हैं। पहला, जनता की भागीदारी और स्थानीय स्व- शासन के माध्यम से प्रशासन का विकेंद्रीकरण। दूसरा, सूचना का अधिकार (आरटीआई) जैसे उपायों के माध्यम से जनता का सशक्तिकरण और तीसरा, अधिकार पर आधारित दृष्टिकोण लागू करते हुए मूलभूत लोकतंत्र की दिशा में अग्रसर होना। इसके उदाहरण हैं- शिक्षा का अधिकार, मनरेगा आदि।

जब इंदिरा गांधी ने 19 महीनों (1975-77) के लिए आपातकाल लगाया, तो देश में बड़े पैमाने पर चौतरफा विरोध प्रदर्शन हुए,जिन्होंने 1977 के आम चुनावों में उनकी पराजय का मार्ग प्रशस्त किया। संदेश बिल्कुल स्पष्ट था। भारत में लोकतंत्र कभी परास्त नहीं हो सकता। इतना ही नहीं, पंचायती राज प्रणाली की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है, जो यह दर्शाती है कि लोकतंत्र शीर्ष से नीचे तक नहीं है, बल्कि इसके बिल्कुल विपरीत है।

70 साल की अवधि में, भारत ने बहुत से क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत ने 1975 में अपने प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट का प्रक्षेपण किया और अब उसकी निगाहें 200 बिलियन डॉलर वाले लाभप्रद रॉकेट बाजार पर टिकी हैं। मंगल मिशन-2013 दुनिया भर में अपने किस्म का सबसे किफायती मिशन होने के नाते उल्लेखनीय रूप से सफल रहा। परमाणु और मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी भारत गौरवपूर्ण स्थिति में है। स्वदेशी तौर पर विकसित ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल हमारे वैज्ञानिकों की योग्यता का देदीप्यमान उदाहरण है। भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजिम (एमटीसीआर) का 35वां सदस्य भी बन चुका है,जिसके लिए चीन पिछले एक दशक से प्रयासरत है।

1951 में, जीवन प्रत्याशा लगभग 37 वर्ष थी, जो 2011 में 65 वर्ष हो गयी। इसी तरह, 1951 में, भारत में केवल 0।399 मिलियन किलोमीटर सडक़ें थीं, जबकि जून 2014 तक यह 4।5 मिलियन किलोमीटर हो गयीं। साक्ष



Related News


सरकार ने जारी की NDC Plicy का मसौदा Digital world

बिजली कंपनी बीएसपीसीएल में इंजीनियरों की नियुक्ति के लिए नौ

बिहार : बियाडा में नियुक्ति के लिए पांच अप्रैल को

कैट-2017 की परीक्षा 26 नवंबर को, अच्छे स्कोर के लिए

20 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन, 26 नवंबर को होगी

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने इंटर पास युवकों से ऑनलाइन

दिल्ली यूनिवर्सिटी में बनें असिस्टेंट प्रोफेसर

आरपीएफ कॉन्स्टेबल के 19,952 पदों पर होगी बहाली

इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवालों के एेसे दे

ITI को लेकर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, अब मिलेगा

भारतीय नौसेना में प्रवेश के हैं कई विकल्प

- झारखंड डाक सर्किल के 256 ग्रामीण डाकघरों में ग्रामीण

Follow Us :

All rights reserved © 2013-2026 samacharnow.com