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रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए करिअर

By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date:17:53:06 PM / Fri, Aug 12th, 2016 |


भारतीय सशस्त्र बल की प्रथम लेफ्टिनेंट जनरल एवं भारतीय नौसेना की प्रथम वाइस एडमिरल पुनीता अरोड़ा ने 1963 में सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (ए.एफ.एम.सी.) पुणे में ज्वाइन किया था। उन्होंने अपने बैच में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। 2004 में वह ए.एफ.एम.सी. की कमांडेंट बनने वाली प्रथम महिला अधिकारी थीं। 1992 में भारतीय सेना ने महिलाओं को सेवाओं में स्वीकार करना प्रारंभ किया था। चेन्नै में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओ.टी.ए।) में जाने वाली प्रथम 25 प्रथम कैडटों में से एक प्रिया झिंगन ने हंसते हुए कहा, ‘‘हमारे कमांडिंग ऑफिसर ने, जब हमारे ट्रंक और अनुरोधों की सूची - गर्म पानी, ट्यूब लाइट एवं एक सैलून देखा तो उन्होंने जमीन पर अपना पैर ही पटक दिया,’’ सपेर शांति टिग्गा ने 2011 में भारतीय सेना की प्रथम महिला जवान बन कर एक अन्य परम्परा को तोड़ा। उस समय वह 25 वर्ष की आयु की थीं और उनके दो बच्चे थे, तथा उन्होंने शारीरिक उपयुक्तता परीक्षा में अपने सभी पुरुष प्रतिद्वंदियों को पछाड़ा था।

भारतीय नौसेना को 2009 में उस समय अपनी दो प्रथम महिला योधी मिलीं, जब सब-लेफ्टिनेंट अंबिका हुडा और सीमा रानी नौसेना की प्रथम महिला एयरबोर्न टेक्निशियन बनीं। उस समय वे दोनों 22 वर्ष की आयु की थीं। 27 वर्षीय लेफ्टिनेंट किरण शेखावत मेवात, हरियाणा से हैं। जून 2016 में अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाली वह पहली महिला नौसेना अधिकारी थीं। 2016 में मोहना सिंह, भावना कंठ और अवनि चतुर्वेदी को भारत की प्रथम महिला फाइटर पायलटों के रूप में भारतीय वायु सेना में कमीशन दिया गया।

लिंग समानता को संभव बनाने के उद्देश्य के साथ भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए नए अवसर खोल दिए हैं और अपनी मानसिक क्षमता प्रमाणित करने के लिए महिलाएं अधिकाधिक संख्या में सामने आ रही हैं।

महिलाओं के लिए उपलब्ध अवसर

भारतीय सशस्त्र बल की चार व्यावसायिक वर्दी सेवाएं हैं:- भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तट रक्षक।

इनके अतिरिक्त विभिन्न अर्ध-सैनिक संगठन एवं अंतर-सेवा संस्थाएं हैं जो नेटवर्क का भाग हैं।

भारतीय सेना में

सशस्त्र बलों में कमीशन प्राप्त अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) द्वारा संचालित दो मुख्य अखिल भारतीय परीक्षाओं के माध्यम से प्रवेश प्राप्त करते हैं।

*राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एन.डी.ए.) और नौसेना रक्षा अकादमी (एन.ए.) परीक्षा: यह अभी तक महिला उम्मीदवारों के लिए नहीं खुली हैं।

*सम्मिलित रक्षा सेवा (सी.डी.एस.) परीक्षा: एक वर्ष में दो बार संचालित की जाती है, स्नातक या स्नातक परीक्षा के अंतिम वर्ष में बैठे उम्मीदवार इस परीक्षा में बैठक सकते हैं। लड़कियां अभी केवल अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओ.टी.ए.) के लिए पात्र हैं। भारतीय सैन्य अकादमी (आई.एम.ए.), भारतीय नौसेना अकादमी (आई.एन.ए.) और भारतीय वायु सेना अकादमी (ए.एफ.ए.) केवल लडक़ों के लिए है।

महिलाएं निम्नलिखित के माध्यम से भारतीय सेना में भी प्रवेश ले सकती हैं:-

*राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन.सी.सी.) विशेष प्रवेश परीक्षा: 19 से 25 वर्ष की आयु की अविवाहित महिलाएं, जिन्होंने अपनी स्नातक डिग्री, न्यूनतम कुल 50' अंकों के साथ उत्तीर्ण की है और एन .सी .सी . वरिष्ठ डिवीजन (सेना) में दो वर्ष की सेवा पूरी कर ली है तथा ‘सी’ प्रमाणपत्र परीक्षा में न्यूनतम ‘बी’ ग्रेड रखती हैं, परीक्षा में बैठ सकती हैं।

*जज एडवोकेट जनरल (जे.ए.जी.) प्रवेश परीक्षा न्यूनतम 55' अंकों के साथ विधि स्नातक (एलएल.बी.) योग्यता रखने वाली अविवाहिता जिनकी आयु 21 से 27 वर्ष के बीच है, भारतीय राज्य बार परिषद में पंजीकरण कराने के लिए पात्र हैं।

*महिलाओं के लिए अल्प सेवा कमीशन (तकनीकी) कार्य: 20 से 27 वर्ष की आयु की अविवाहित महिला इंजीनियर महिलाओं के लिए एस .एस .सी . (टेक .) पदों के लिए आवेदन कर सकती हैं।

एस.एस.सी.-टेक और गैर-टेक पदों के लिए रक्षा कार्मिकों की विधवाएं भी आवेदन कर सकती हैं। भले ही उनके बच्चे हों, किंतु उन्होंने पुनर्विवाह नहीं किया हो। ऐसी उम्मीदवारों के लिए उच्च आयु-सीमा 4 वर्ष तक शिथिलनीय है।

चयन के उद्देश्य से उम्मीदवारों को सेवा चयन बोर्ड (एस.एस.बी.) साक्षात्कार, मनोवैज्ञानिक अभिवृत्ति परीक्षा (पी.ए.टी.) और चिकित्सा परीक्षा में बैठना होता है।

शारीरिक मानदण्ड

भारतीय सेना में प्रवेश प्राप्त करने के लिए महिला उम्मीदवारों को कुछ शारीरिक मानदंड पूरे करने होते हैं, जैसे:-

*न्यूनतम ऊंचाई: 152 सें.मी. (पूर्वोत्तर एवं पर्वतीय क्षेत्रों की उम्मीदवारों के लिए 5 सें.मी. और लक्षद्वीप की उम्मीदवारों के लिए2 सें.मी. की छूट।)

*न्यूनतम वज़न: 42 कि .ग्रा . (पूर्वोत्तर, पर्वतीय क्षेत्रों एवं लक्षद्वीप की उम्मीदवारों के लिए वजन ऊंचाई के

*दृष्टि तीक्ष्णता: दूर दृष्टि में बेहतर आंख के लिए 6/6 और खराब आंख के लिए 6/18. मायोपिया माइनस 3.५ से अधिक नहीं हो (एस्टिग्मेशन सहित)

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