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भारतीय प्रशासनिक प्रारंभिक परीक्षा-2016 : कुछ चिंतन

By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date:17:54:24 PM / Fri, Aug 12th, 2016 |


आकर्षक सिविल सेवा परीक्षा के लिए देश भर में संचालित की जाने वाली अति प्रतीक्षित प्रारंभिक परीक्षा अगले सप्ताह ली जाएगी. मात्र उत्तीर्णता परीक्षा होने के बावजूद, प्रारंभिक परीक्षा, कई तरह से सिविल सेवा में आपकी अंतिम सफलता की मुख्य निर्धारक घटक होती है. इसके कई कारण हैं. पहला, लाखों सहभागी प्रारंभिक परीक्षा में बैठते हैं जो प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यधिक ऊंचा करते हैं. प्रारंभिक परीक्षा में बैठने वाले 4-5 लाख उम्मीदवारों में से केवल लगभग 15000 उम्मीदवार ही मुख्य परीक्षा के लिए उत्तीर्ण होंगे. इसका अर्थ यह हुआ कि सक्षम, परिश्रमी उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है. इसमें प्रत्येक अंक गिना जाएगा. दूसरा,प्रारंभिक परीक्षा का पाठ्यक्रम मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम की तुलना में अव्यवस्थित प्रकृति का होता है. अव्यवस्थित से मेरा मतलब है कि प्रारंभिक परीक्षा के लिए यथातथ्य रूप में कोई व्यापक पाठ्यक्रम नहीं पढऩा होता है. संघ लोक सेवा आयोग के कथन के अनुसार सामान्य अध्ययन प्रारंभिक पाठ्यक्रम प्रकृति में केवल संकेतात्मक होता है. इसकी ऐसी कोई विशेष निर्धारित सीमाएं नहीं हैं जो इसे कोई व्यवस्थित या निश्चित रूप देने के लिए इसे कठिन बनाएं. इस तरह यह आप पर निर्भर होता है कि आप अपने ढंग से इसका पाठ्यक्रम तय करें और जो प्रासंगिक हो उसकी तैयारी करें. तीसरे, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा हाल ही के वर्षों में भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय वन सेवा परीक्षा को परस्पर मिलाने की प्रक्रियाओं ने समस्या को और जटिल कर दिया है. दो विभिन्न परीक्षाओं की आवश्यकताओं को एकल परीक्षा में समाधान करने के प्रयास किए गए हैं जो प्रारंभिक परीक्षा में संतुलन की समस्या पैदा करते हैं. भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए प्रारंभिक परीक्षा की संरचना किसी सिविल कर्मचारी से सेवा की आवश्यकता और अपेक्षित अभिरुचि के अनुसार होनी चाहिए. भारतीय वन सेवा परीक्षा के लिए भी यही तथ्य सत्य है. इसका अर्थ यह हुआ कि इन दो विभिन्न परीक्षाओं के लिए कुछ ही सामान्य प्रश्न होने चाहिए.

यह जैसी है, इसे रहने दीजिए, मैं यहां जिस मूल बात पर बल दे रहा हूं वह यह है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय वन सेवा परीक्षा के लिए प्रारंभिक परीक्षा को आपस में मिलाने के, तैयारी करने के लिए अपने आधार हैं. भारतीय वन सेवा परीक्षा की आवश्यकताओं को समाहित करने के लिए कई प्रश्न अब पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तथा विज्ञान शाखाओं से भी पूछे जा रहे हैं. ऐसा, भारतीय प्रशासनिक सेवा पाठ्यक्रम के पारम्परिक क्षेत्रों जैसे इतिहास, राजनीति आदि पर प्रश्न कम देकर किया जा रहा है. प्रारंभिक परीक्षा में बैठते वक्त इस आवश्यकता को मन में उजागर होना चाहिए. दूसरे, वर्तमान घटनाओं पर पहले की अपेक्षा अधिक बल देना अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. अधिकांश प्रश्न अब इस तरह के होते हैं जो समाचार पत्रों तथा अन्य मीडिया में दिए गए महत्वपूर्ण समाचारों के बारे में उम्मीदवार के ज्ञान स्तर का मूल्यांकन करते हैं. प्रश्न-पत्र में सामान्यत: पिछले एक वर्ष की वर्तमान-घटनाएं शामिल की जाती हैं. प्रारंभिक परीक्षा 2016 के लिए, एक वर्ष के समाचारों का अर्थ है 01 अगस्त, 2015 से 30 जून, 2016 के बीच की घटनाएं. लेकिन मैं यहां उल्लेख करना चाहूंगा कि आजकल इस अवधि से पहले की घटनाओं के भी प्रश्न पूछे जा रहे हैं. उदाहरण के लिए अगस्त 2015 से पहले दिए गए समाचार जैसे किसी महत्वपूर्ण कान्फरेंस, प्राकृतिक आपदा, किसी चिकित्सा खोज आदि पर भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं. इसलिए 2014 तथा 2015 की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं पर तैयारी करना भी अधिक विवेक सम्मत रहेगा. वर्तमान घटनाओं का सबसे अधिक कठिन पहलू यह है कि कोई छात्र किसी ऐसे समाचार की जानकारी कैसे ले सकता है, जिसकी वह तैयारी कर रहा है. जब तक किसी छात्र को वर्तमान घटना आधारित समाचार के सभी पहलुओं के बारे में जानकारी नहीं होगी वह उसका उत्तर नहीं दे सकता. उदाहरण के लिए, सभी ने दक्षिण चीन समुद्र और उस पर अधिकार के चीन के दावों के बारे में पढ़ा है, यहां तक कि, चीन के विरुद्ध हाल ही के निर्णय के बारे में भी उम्मीदवार को जानकारी हो सकती है. किंतु संघ लोक सेवा आयोग दक्षिण चीन समुद्र के बारे में सीधे नहीं पूछ सकता. इसके स्थान पर आयोग यू.एन.सी.एल.ओ.एस. (संयुक्त राष्ट्र समुद्र विधि सम्मेलन) के बारे में प्रश्न पूछ सकता है, क्योंकि दक्षिण चीन समुद्र की समस्या का समाधान यू.एन.सी.एल.ओ.एस. कार्य तंत्र के अधीन किया जाना है. इसलिए आपको यू.एन.सी.एल.ओ.एस. के प्रावधानों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए. इसी तरह, भारत एस.सी.ओ. का सदस्य बना है, इस संदर्भ में किसी भी छात्र को इस संगठन की प्रकृति, इसकी प्राथमिकताओं, भारत के इसमें शामिल होने के लाभ आदि की जानकारी लेने के प्रयास करने चाहिए. केवल यह जानकारी कि भारत एस.सी.ओ. का सदस्य बन गया है, इस विषय पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए पर्याप्त नहीं है.

इसलिए मेरा सुझाव है कि प्रारंभिक परीक्षा में वर्तमान घटनाओं की तैयारी के लिए एक नए परिप्रेक्ष्य की आवश्यकता है क्योंकि यह,परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है. अब मैं अगले सप्ताह (7 अगस्त, 2016 को) होने वाली प्रारंभिक परीक्षा के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में बता रहा हूं, जो प्रतिभागियों के लिए सहायक सिद्ध हो सकते हैं:-

1.अपनी तैयारी को विस्तृत रूप में दोहराएं: इस चरण पर नई बातों को पढऩे की प्रवृत्ति रोक दें. दोहराने पर बल दें. अब समय आ गया है कि आप अपनी पिछले 5-6 महीनों की तैयारी को समेकित कर लें. यदि आप, अपनी की गई पढ़ाई को व्यापक रूप में नहीं दोहराएंगे तो हो सकता है परीक्षा के दौरान आप उसे याद न रख पाएं. इसे दोहराने के लिए मुख्य मुद्दों को देखें क्योंक



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