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चिराग को छोड़कर गए लोगों का नहीं है कोई जनाधार- कांग्रेस
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समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Sat ,19 Jun 2021 06:06:30 pm |
बिहार : लोक जनशक्ति पार्टी में इन दिनों चल रही उठापटक को लेकर सरगर्मी तेज है. इन सब के बीच शनिवार को कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास भी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान के साथ खड़े नजर आए.
उन्होंने कहा, लोजपा में चिराग पासवान के साथ उनके सांसदों ने जो कुछ किया, वह ठीक नहीं है. आने वाले दिनों में जनता उन्हें सबक जरूर सिखाएगी. वहीं कांग्रेस की टूट को लेकर भक्त चरण दास ने कहा, यह सिर्फ अफवाह है. कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से एकजुट है.यह भी पढ़ें- चिराग की वो एक भूल जिसने 'बंगले' में कर दिया अंधेरा!सांसदों का नहीं कोई जनाधार
चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस के बीच असली लोजपा और नकली लोजपा को लेकर चल रही लड़ाई का मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है. जिसको लेकर कांग्रेस अब चिराग पासवान के साथ खड़ी नजर आ रही है. भक्त चरण दास ने कहा, चिराग पासवान के साथ उनकी पार्टी के सांसदों ने भले ही कुछ लाभ के लिए कोई फैसला ले लिया हो. लेकिन पशुपति पारस गुट के जो सांसद एलजेपी से अलग हुए हैं. उनका कोई जनाधार नहीं है.
निर्णय चिराग पासवान का होगा
उन्होंने कहा, चिराग पासवान आगे की राजनीति किस आधार पर करेंगे, उनका राजनीतिक बेस क्या होगा, यह उन पर डिपेंड करता है. वो किसके साथ रहना चाहते हैं, एनडीए के साथ ही रहना चाहते हैं या फिर वे किसी और दल के साथ गठबंधन करके आगे की राजनीति करना चाहेंगे. वे खुद एक रमे हुए राजनीति खिलाड़ी हैं.
जदयू द्वारा लगातार कांग्रेस में टूट को लेकर किए जा रहे दावे को भक्त चरण दास ने सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा है कि हमारी पार्टी मजबूत स्थिति में है. पार्टी के विधायक पूरी तरह से बरकरार हैं. सरकार के प्रति जो उनके बयान आते हैं, उसको भी हमने देखा है. इसलिए हम कह सकते हैं कि पार्टी में कोई टूट नहीं होने वाली है.किसी नेता का दूसरे दल के नेता के साथ बातचीत होना, मतलब यह नहीं होता कि वह टूटने वाली है. या फिर उनके पाले में जाने वाले हैं. हमारा संबंध भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अच्छा है. तो इसका मतलब यह नहीं कि हम नीतीश कुमार के साथ चले जाएंगे. ऐसा कदापि नहीं होगा.यह भी संगठन को मजबूत करने को लेकर भक्त चरण दास ने कहा कि बिहार के शीर्ष नेतृत्व के जितने भी नेता हैं. वे सभी नेता दिल्ली जाएंगे. आलाकमान से उनकी मुलाकात होगी. बिहार के बारे में राजनीतिक हालात पर वहां चर्चा की जाएगी. उसके बाद ही आगे की रणनीति पर हम खुलासा कर सकते हैं.
बता दें कि लोजपा पर कब्जे की लड़ाई अब चुनाव आयोग पहुंच गई है. पशुपति पारस गुट और चिराग गुट दोनों ही चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटा चुके हैं. अब चुनाव आयोग को निर्णय लेना है कि लोजपा पारस की है या चिराग की. आज पशुपति पारस गुट भी चुनाव आयोग पहुंचा और चुनाव आयोग को जानकारी दी कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति पारस को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चुन लिया गया है.यह भी पढ़ें- पार्टी तोड़कर भी अधर में पशुपति, कहा- गुप्त है मोदी सरकारचुनाव आयोग में जमा किया गया सर्टिफिकेट
राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर रिटर्निंग ऑफिसर की तरफ से जो सर्टिफिकेट पारस को मिला है, वह चुनाव आयोग में पारस गुट ने जमा कर दिया. पशुपति पारस का दावा है कि पार्टी के 95% लोग उनके साथ हैं.
बता दें कि लोजपा में बड़ी टूट हुई है. छह में से पांच सांसद चिराग से अलग हो गए हैं. चिराग के चाचा और सांसद पशुपति पारस बागी गुट का नेतृत्व कर रहे हैं एवं असली लोजपा होने का भी दावा कर रहे हैं. बागी गुट ने पारस को संसदीय दल का नेता व राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया है. पहले चिराग संसदीय दल के नेता एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष थे.यह भी
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