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By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Tue ,08 Aug 2017 07:08:50 pm |
रांची : झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू हो चुका है. शीत सत्र की तरह इस सत्र के भी पूरी तरह धुल जाने के आसार हैं. विपक्ष ने प्रस्तावित धर्मांतरण बिल, सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन और किसानों को मुआवजे की मांग पर पहले ही दिन सरकार की जबरदस्त घेराबंदी की. विपक्ष के तेवर इतने कड़े थे कि स्पीकर को कल तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर देनी पड़ी.
इसके बाद मुख्य विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन की अगुवाई में सदन के बाहर हंगामा किया. हाथों में ‘सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन रद्द करो’ का नारा लिखे पोस्टर बैनर लेकर झामुमो विधायकों ने असेंबली बिल्डिंग के मेन गेट पर सरकार विरोधी नारे लगाये. हेमंत सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास के चंद किलोमीटर दूर किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है. राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है, लेकिन उसे ठीक करने की दिशा में कोई काम नहीं हो रहा.
दूसरी तरफ, भूमि अधिकार आंदोलन की अगुवाई में 15 से अधिक आदिवासी और किसान संगठन विधानसभा का घेराव करने के लिए निकल पड़े हैं. आंदोलन की नेता दयामनि बारला ने बताया कि 29-30 जून को भूमि अधिकार आंदोलन की बैठक में फैसला हुआ था कि आदिवासियों के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया जायेगा. उन्होंने कहा कि जब तक सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन को रद्द नहीं कर दिया जाता, महुआ नीति और आदिवासियों की जमीन को लैंड बैंक में शामिल करने के फैसले को वापस नहीं ले लेती, उनका आंदोलन जारी रहेगा.दयामनि बारला ने साथ ही कहा कि आदिवासियों को धोखा देकर उनकी जमीनें ऑनलाइन ट्रांसफर हो रही हैं. सरकार को इसे रोकने की दिशा में पहल करनी होगी. इतना ही नहीं, कर्ज में डूबे किसानों को कर्जमाफी का लाभ देना होगा और जिन किसानों ने बैंकों के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली है, सरकार को उन्हें 25-30 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा.
दयामनि बारला ने कहा कि हजारों लोग आज विधानसभा का घेराव करने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक रोकने की कोशिश की, तो वे प्रतिरोध करेंगी, लेकिन उनके साथी कोई हिंसात्मक कदम नहीं उठायेंगे. उनका आंदोलन शांतिपूर्वक चलेगा. भूमि अधिकार आंदोलन के कार्यक्रम को देखते हुए विधानसभा के बाहर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये हैं. दयामनि बारला ने बताया कि भूमि अधिकार आंदोलन और उसके सहयोगी संगठन विधानसभा का घेराव करने के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपेंगे.
भूमि अधिकार आंदोलन का आरोप है कि झारखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी आदिवासी हितों के कानून में बदलाव लाकर उनसे उनके सारे अधिकार छीन लेना चाहती है. दयामनि बारला ने बताया कि झारखंड में सत्ता पर काबिज भाजपा नीत गंठबंधन की सरकार सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन, गैरमजरुआ आम, गैरमजरुआ खास, नदी–नाला, चारागाह, आम रास्ता, सरना–मसना, तालाब–खेल के मैदान, अखड़ा जैसे समुदायकि जमीन को भूमि बैंक में शामिल करके और जनविरोधी महुआ नीति बना कर आदिवासी–मूलवासी, रैयतों, किसनों की जमीन एवं जीविका छीनना चाहती है
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