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अयोध्या की विवादित भूमि पर बने राम मंदिर-शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय में शपथ पत्र दायर कर कहा है

By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Tue ,08 Aug 2017 07:08:48 pm |


समाचार नाऊ ब्यूरो  : अयोध्या में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होने से पहले उत्तर प्रदेश के शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय में शपथ पत्र दायर कर कहा है कि विवादित स्थल पर भगवान राम का मंदिर बनना चाहिए. साथ ही बोर्ड ने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद उसकी संपत्ति थी और इस विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए बातचीत करने का हक केवल उसके पास है. बोर्ड ने कहा कि उसके पास 1946 तक विवादित जमीन का कब्जा था. शिया वक्फ बोर्ड ने न्यायालय से कहा, अयोध्या में विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में एक मस्जिद का निर्माण किया जा सकता है, जो राम जन्मभूमि की जगह से उचित दूरी पर हो. वक्फ बोर्ड ने विवाद का मैत्रीपूर्ण समाधान तलाशने की खातिर एक समिति गठन करने के लिए न्यायालय से समय मांगा.

इस मामले में भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड ने भगवान की मर्जी से हस्तक्षेप किया है. वहीं, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक सफरयाब जिलानी ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड का शपथ पत्र सिर्फ अपील है. इस अपील की कानूनी तौर पर कोई अहमियत नहीं है. बता दें कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई होगी. इस तीन सदस्यीय पीठ में चीफ जस्टिस जेएस खेहर के अलावा जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. इस मामले से जुड़े पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. सात वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करने जा रहा है. पिछले दिनों भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षतावाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगायी थी. जिस पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि वह जल्द ही इस पर निर्णय लेंगे.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 2010 में विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निरमोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश दिया था. कुछ माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का अदालत से बाहर समाधान निकालने की संभावना तलाशने के लिए कहा था. इसे लेकर पक्षकारों की ओर से प्रयास किये गये, लेकिन समाधान नहीं निकल सका.

पिछले दिनों एक घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े मामलों में पक्ष बनने का फैसला किया है. बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा था कि बोर्ड सदस्यों की राय है कि वक्फ मस्जिद मीर बकी, जिसे अयोध्या में बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है, बाबर के समय मीर बकी द्वारा बनवायी गयी शिया मस्जिद थी. मीर बकी शिया थे. रिजवी ने दावा किया कि इस तथ्य के अनुसार वह शिया मस्जिद थी. केवल मस्जिद के इमाम ही सुन्नी थे, जिन्हें शिया मुतवल्ली पारिश्रमिक देते थे और वहां शिया-सुन्नी दोनों ही नमाज पढ़ते थे. रिजवी ने कहा था कि 1944 में सुन्नी बोर्ड ने मस्जिद अपने नाम से पंजीकृत करा ली थी, जिसे शिया बोर्ड में 1945 में अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन शिया बोर्ड मुकदमा हार गया. शिया बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि इन वर्षों में किसी ने उक्त आदेश की समीक्षा के लिए हाइकोर्ट या किसी अन्य अदालत में याचिका दायर नहीं की. अब मेरे पास आदेश की प्रति है और मुझे बोर्ड ने जिम्मेदारी दी है कि मस्जिद के स्वामित्व पर दावा पेश किया जाये. इसी क्रम में मंगलवार को शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है



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