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By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Fri ,04 Aug 2017 08:08:59 pm |
समाचार नाऊ ब्यूरो - जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) पूर्व व्यवस्था में कोयले पर 6 प्रतिशत की दर से उत्पाद शुल्क, प्रति टन कोयला उत्पादन पर 10 रुपये की दर से भंडारण (स्टोइंग) संबंधी उत्पाद शुल्क, 5 प्रतिशत की दर से वैट (राज्य के भीतर होने वाली बिक्री पर) और 2 प्रतिशत की दर से केन्द्रीय बिक्री दर (अंतर-राज्य बिक्री पर, फॉर्म सी पेश करने पर) अदा करने पड़ते थे। जीएसटी को लागू किये जाने के बाद इन सभी करों और शुल्कों का विलय कर दिया गया है और उपभोक्ताओं पर 5 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जा रहा है। इस आशय की जानकारी विद्युत, कोयला तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि जीएसटी से पहले 400 रुपये प्रति टन की दर से स्वच्छ पर्यावरण उपकर लगता था, जिसे समाप्त कर दिया गया है और अब इसके स्थान पर 400 रुपये प्रति टन की दर से एक नया शुल्क लगता है, जिसका नाम जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर है। हालांकि, इससे पहले स्वच्छ पर्यावरण उपकर (सेस) पर वैट/सीएसटी लगता था, लेकिन अब इस तरह का कोई भी टैक्स जीएसटी भरपाई उपकर पर नहीं लगता है।
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