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By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Fri ,16 Jun 2017 06:06:53 pm |
समाचार नाऊ ब्यूरो मुंबई : मुंबई की एक विशेष टाडा अदालत ने वर्ष 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में मुख्य मास्टरमाइंड मुस्तफा दोसा और प्रत्यपर्ति कर भारत लाये गये गैंगस्टर अबू सलेम को शुक्रवार को दोषी ठहराया. दोसा को टाडा अधिनियम, हथियार कानून और विस्फोटक कानून के तहत अपराधों के अलावा आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत साजिश और हत्या के आरोपों पर दोषी ठहराया गया जबकि सलेम को धमाकों के लिए हथियारों को गुजरात से मुंबई लाने का दोषी पाया गया.
सलेम ने 16 जनवरी 1993 को अभिनेता संजय दत्त को भी उनके आवास पर एके 56 राइफल, 250 गोलियां और कुछ हथगोले सौंपे दिये थे. संजय दत्त भी अवैध रूप से हथियार रखने के लिए इस मामले में आरोपी हैं. दो दिन बाद 18 जनवरी 1993 को सलेम और दो अन्य लोग दत्त के घर गये और दो राइफल तथा कुछ गोलियां वापस ले आएइससे पहले सीबीआई ने एक याचिका दायर र कहा था कि सलेम पर जो आरोप लगाये गये वे भारत और पुर्तगाल के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के खिलाफ हैं जिसके बाद 2013 में अदालत ने सलेम के खिलाफ लगाये गये कुछ आरोप वापस ले लिए.
दोसा कथित तौर पर आईडीएक्स समेत अन्य विस्फोटकों को भारत लाने का मास्टरमाइंड था और उसने धमाके करने के लिए हथियारों का प्रशिक्षण लेने कुछ युवकों को पाकिस्तान भेजा.र कहा था कि सलेम पर जो आरोप लगाये गये वे भारत और पुर्तगाल के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के खिलाफ हैं जिसके बाद 2013 में अदालत ने सलेम के खिलाफ लगाये गये कुछ आरोप वापस ले लिए. दोसा कथित तौर पर आईडीएक्स समेत अन्य विस्फोटकों को भारत लाने का मास्टरमाइंड था और उसने धमाके करने के लिए हथियारों का प्रशिक्षण लेने कुछ युवकों को पाकिस्तान भेजा.
इन नृशंस हमलों में 257 लोग मारे गये, 713 लोग गंभीर रूप से घायल हो गये और 27 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो गयी थी. वर्ष 2007 में पूरी हुई पहली चरण की सुनवाई में टाडा अदालत ने इस मामले में 100 लोगों को दोषी करार दिया था जबकि 23 लोगों को बरी कर दिया गया था. सात आरोपी अबू सलेम, मुस्तफा दोसा, करीमुल्लाह खान, फिरोज अब्दुल राशिद खान, रियाज सिद्दकी, ताहिर मर्चेंट और अब्दुल कयूम के मुकदमे मुख्य मामले से अलग चले क्योंकि इन्हें मुख्य मुकदमे की सुनवाई खत्म होने के समय गिरफ्तार किया गया.
12 मार्च 1993 को देश की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई में अप्रत्याशित आतंकवादी हमले हुए. करीब दो घंटे की अवधि में एक के बाद एक 12 सिलसिलेवार बम धमाके हुए. ये धमाके बंबई स्टॉक एक्सचेंज, कत्था बाजार, शिवसेना भवन के नजदीक लकी पेटोल पंप, सेंचुरी बाजार के समीप पासपोर्ट ऑफिस के पीछे, माहिम कॉजवे में फिशरमैन कॉलोनी, एयर इंडिया इमारत के बेसमेंट, जावेरी बाजार, हॉटल सी रॉक, प्लाजा थिएटर, सेंटॉर होटल (जुहू), सहारा हवाईअड्डा और सेंटॉर होटल (हवाईअड्डे के समीप) हुए थे.
विश्व में यह पहला आतंकवादी हमला था जिसमें द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इतने बड़े पैमाने पर आरडीएक्स (रिसर्च डिपार्टमेंट एक्सप्लोसिव) का इस्तेमाल किया गया था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के लिए भगोडे डॉन दाउद इब्राहिम ने फरार आरोपी टाइगर मेमन, मोहम्मद दोसा और मुस्तफा दोसा के साथ मिलकर भारत में आतंकवादी हमले करने की साजिश रची.
अभियोजन ने कहा कि इस अपराध का उद्देश्य भारत सरकार को आतंकित करना, लोगों में आतंक पैदा करना, एक वर्ग के लोगों के लिए घृणा पैदा करना और साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के इरादे से आतंकवादी हमले करना था. उसने कहा कि साजिशकर्ताओं ने असलहों, गोला बारुद, विस्फोटक, हथगोले और उच्च विस्फोटक सामग्री जैसे कि आरडीएक्स की भारत में तस्करी की और इसका भंडारण किया.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुस्तफा दोसा, टाइगर मेमन और छोटा शकील ने हथियारों और विस्फोटकों का इस्तेमाल करने के लिए पाकिस्तान और भारत में प्रशिक्षण शिविर लगाने की व्यवस्था की. उन्होंने हथियारों के प्रशिक्षण के लिए लोगों को दुबई के जरिए भारत से पाकिस्तान भेजा. अभियोजन पक्ष ने साथ ही कहा कि षडयंत्रकारियों ने धमाके करने से पहले 15 बार मुलाकात की
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