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By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Sun ,30 Apr 2017 12:04:07 pm |
समाचार नाऊ ब्यूरो - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 31वीं बार मन की बात कार्यक्रम के जरिए देश की जनता को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर सुबह 11 बजे किया गया। मन की बात में बोलते हुए पीएम ने कहा कि आम जनता का सुझावों के लिए आभार, ये सामान्य बात नहीं है। कर्मचारी अपने अनुभवों के आदार पर राय भेजते हैं जो सच में काफी सुखद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आकाशवाणी से 31 वीं बार मन की बात की. उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा, मन की बात में विविधताओं से भरी हुई जानकारियां मिलती हैं. मन की बात पर आये सुझाओं पर सरकार अध्ययन करती है. देश के हर कोने में शक्तियों का अम्बार पड़ा है.
जलवायु परिर्वतन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल है। जलवायु परिर्वतन आज सबसे बड़ी समस्या है क्योंकि इस बार मार्च-अप्रैल में ही मई-जून की गर्मी देखने को मिली। बता दें कि पिछले सप्ताह मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने न्यू इंडिया पर देश की जनता को संबोधित किया था। गौरतलब है कि पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम में आम आदमी से जुड़े अहम मुद्दों को उठाते हैं। इसके लिए पीएम की तरफ से देश की जनता से विषय और सुझाव देने की अपील भी की जाती है।
मोदी ने कहा, मैं सबसे पहले तो अधिकतम सुझाव जो कि कर्मयोगियों के हैं, समाज के लिए कुछ न कुछ कर गुजरने वाले लोगों के हैं. मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं. मोदी ने कहा, ये चीजें जब ध्यान में आयी तो मुझे लगा कि ये सुझाव सामान्य नहीं हैं, ये अनुभव के निचोड़ से निकले हुए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कई युवा कंफर्ट जोन में ही रहना चाहते हैं. लेकिन मैं गर्मियों की छुट्टी में जाने वाले युवाओं को तीन सुझाव देना चाहता हूं. पहला तो नई जगह घूमने जाएं, नये हुनर सीखें और बिना रिजर्वेशन की ट्रेन यात्रा करें.
* मोदी ने वीआईपी कल्चर की चर्चा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीआईपी कल्चर के बारे में मन की बात में चर्चा करते हुए कहा, देश में वीआईपी की जगह इपीआई ( Every Person Is Important हर सख्श महत्वपूर्ण) का महत्व बढ़े. पीएम मोदी ने कहा, सरकारी निर्णय से लाल बत्ती का जाना वो तो एक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन हमें इसे मन से भी प्रयत्नपूर्वक बाहर निकालना है. हम सब मिलकर जागरूक प्रयास करें तो ये मन से भी निकल सकता है.
* मोदी ने संत रामानुजाचार्य और आंबेदकर को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रामानुजाचार्य को याद करते हुए कहा, इस वर्ष संत रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती है. हमें उस समय के समाज के बारे में सोचना चाहिए. रामानुजाचार्य जी ने समाज की बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. उन्होंने अपने आचरण द्वारा लोगों में अपनी जगह बनाई. अछूत कहे जाने वालों को गले लगाया. मंदिर प्रवेश के लिए आंदोलन किए. उन्होंने कहा कि भारत सरकार उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी करेगी.
पीएम ने कहा कि 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में भी बनाया जाता है. पीएम ने कहा इस मौके पर बाबा साहेब आंबेडकर की याद आती है. श्रमिकों के कल्याण के लिए उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है. जगत गुरु बश्वेश्वर ने भी श्रम श्रमिक पर गहन विचार रखे थे. उन्होंने कहा था कि अपने घर पर परिश्रम से भगवान प्राप्त होते हैं. उन्होंने कहा था कि श्रम ही ईश्वर है. पीएम नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा का जिक्र करते हुए कहा कि बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक है.
गौरतलब हो कि 30 वें मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से बदलाव का अह्वान किया था. उन्होंने न्यू इंडिया के बारे में बात करते हुए कहा था कि सभी देशवासी अगर संकल्प करें और मिलकर कदम उठाते चलें, तो न्यू इंडिया का सपना हमारे सामने सच हो सकता है. हर कोई अपने नागरिक धर्म और कर्तव्य का पालन करे, यही अपने आप में न्यू इंडिया की एक अच्छी शुरुआत बन सकता है.'
30 वें मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 21 वीं सदीं को भारत की सदी बनाने के लिए लोगों को संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया था. उन्होंने कहा था कि जब हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, तब कौन हिन्दुस्तानी ऐसा होगा, जो भारत को बदलना नहीं चाहता होगा; कौन हिन्दुस्तानी होगा, जो देश में बदलाव के लिये हिस्सेदार बनना नहीं चाहता हो. सवा-सौ करोड़ देशवासियों की ये बदलाव की चाह, ये बदलाव का प्रयास, यही तो है, जो नये भारत, न्यू इंडिया , इसकी मज़बूत नींव डालेगा.
न्यू इंडिया न तो कोई सरकारी कार्यक्रम है, न ही किसी राजनैतिक दल का घोषणा पत्र है और न ही ये कोई प्रोजेक्ट है. न्यू इंडिया सवा-सौ करोड़ देशवासियों का आह्वान है. यही भाव है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी मिलकर के कैसा भव्य भारत बनाना चाहते हैं. सवा-सौ करोड़ देशवासियों के मन के अन्दर एक आशा है, एक उमंग है, एक संकल्प है, एक चाह है
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