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By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Thu ,23 Mar 2017 10:03:51 am |
समाचार नाऊ ब्यूरो - बिहार में चल रही महागठबंधन की सरकार में झमेले कम नहीं हो रहे है। एम मामला सुलझता है दूसरा उलझा जाता है। राजनीतिक रूप से अलग अलग बयान को लेकर महागठबंधन में विभेद तो रहता है लेकिन अब इसका असर सरकार के काम काज पर भी दिखने लगा है। 105 वें बिहार दिवस पर राजद और लालू परिवार के किसी सदस्य के नहीं षामिल होने से सियासत की बाजार में चर्चा गर्म हो गयी है... यह संयोग है या फिर रणनीति आने वाले समय में इस बात का खुलासा होगा।
आप को बता दें की बिहार दिवस को अयोजित करने का काम षिक्षा विभाग के पास है और षिक्षा विभाग ही इस काम को करता है और शिक्षा विभाग के मंत्री कांग्रेस प्रदेष अघ्यक्ष अषोक चैधरी हैं और ऐसे में कार्ड पर उपमुख्यमंत्री के नाम का न होना कई सवाल खडा करता है मामला यहीं नही खत्म होता मामले की पीडा और इसमें एक और कडी जुडी हुई है। बिहार में गुरू गोविन्द ंिसह के 350 वें प्रकाष पर्व में भी लालू यादव और उनके परिजनों के बैठने को लेकर भी विवाद खडा हुआ था।
प्रकाश पर्व के लिए आयोजित कार्यक्रम में लालू यादव के साथ ही बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और स्वास्थ मंत्री तेज प्रताप भी नीचें बैठे थे हालांकि लालू यादव ने उसके बाद पूरे मामले को यह कहकर खत्म कर दिया था कि इसे तूल हम नहीं देते क्यूं कि जिसकी पूजा करने उनके सामने नहीं उनके सनिध्य में नीचे ही बैठना हितकारी है। सवाल यह उठ रहा है कि इस बार सरकार जो कार्ड छपवाया था उसमें उप मुख्यमंत्री का नाम नहीं था और न ही उन्हें बुलाया गया था। अब मामला यही है कि आखिर राजद इसपर क्या रूख अख्तियार करेंगा
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