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जानिए 10 साल पहले नीतीश ने कबूली थी कौन सी 2 गलतियां

By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Wed ,01 Mar 2017 07:03:42 pm |


समाचार नाऊ ब्यूरो - आज से 10 साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी 2 गलतियों को माना था आपको जानकर के हैरानी होगी बिहार में जिस कानून व्यवस्था को लेकर आज आईएएस अधिकारी राज भवन का चक्कर लगा रहे हैं राष्ट्रपति से मिलने की धमकी दे रहे हैं 2007 में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कह दिया था कि बिहार में सबसे भ्रष्ट आईएएस अधिकारी ही है |
हलाकि सवाल पत्रकारो की बैठक में इस विषय को लेकर उठा था खुद नितीश कुमार ने पूछा था कि मेरी दो गलतियां क्या है वह बताया जाए नीतीश द्वारा यह प्रश्न उठाए जाने के बाद एक वरिष्ठ पत्रकार ने उनसे यह कहा था कि आप लोगों से मिलते नहीं हैं और बिहार में भ्रष्टाचार है नितीश कुमार ने इन दोनों बातों को तरजीह देते हुए कहा कि आपकी दोनों बातें सही हैं लेकिन इस पर मेरा उत्तर भी जान लीजिए

 मैं अगर लोगों से मिलना शुरु कर दूं तो जो फाइलए मेरे पास आती है उनको पढ़ना मैं बंद कर दूंगा या यूं कहें कि मैं उन्हें नहीं पढ़ पाऊंगा और उसके बाद जो कुछ होगा उसके बारे में कहना और सुनना बेमानी हो जाएगी क्योंकि यहां पर काम करने वाले लोगों में और खास तौर से बड़े अधिकारियों में भ्रष्टाचार उनके जीवन शैली की सबसे बड़ी आदत बन चुकी है यह बातें मुख्यमंत्री ने 2007 में कही थी

 हलाकि सुशासन न्याय के साथ विकास कानून का राज जैसे नाम सरकारी व्यवस्था को गुणवत्ता के साथ चलाने की मुहिम के तहत नितीश ने अपनी सरकार में जरूर रखा था और उसको लेकर कई बार यह आरोप भी उठे थे कि जिस सुशासन का नारा दिया जा रहा है जिन अधिकारियों के बूते दिया जाता है उनमें भ्रष्टाचार और उनके द्वारा भ्रष्टाचार बिहार के लिए अभिशाप बनता जा रहा है यह बात दीगर है कि नितीश के शासनकाल में ही कई आईएएस अधिकारी जेल की हवा खा चुके हैं या फिर विभागीय अनुसंसा हुई है जांच की और निलंबित भी रहे हैं

 लेकिन अब जो कुछ हो रहा है भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की ऐसी बांगी है जिसमें दबाव गलत को सही करने का दिया जा रहा है सरकार यह मान चुकी है कि बिहार में विकास के रुकने का बहुत बड़ा कारण इन अधिकारियों का भ्रष्ट होना है बात यहीं तक नहीं रुकी है नितीश कुमार सार्वजनिक मंच से कई बार यह कह चुके हैं कि कफन में कोई जेब नहीं होती और ना ही यहां से कोई कुछ लेकर जाएगा लेकिन आदत है कि मानता नहीं यह भी सही है बिहार में आए बिहार कैडर के आईएएस जब दूसरे राज्यों में जाते हैं तो IAS पर हो रही कार्रवाई के उपहास के शिकार भी होते हैं IAS के घर में स्कूल खोलने का मामला हो चाहे उनकी जमीन को जप्त करने का यह तो तय है बिहार में भ्रष्टाचार अधिकारियों की बपौती रही है और यही वजह है कि अपने अग्रजों की करतूत को बाहर जाने वाले IAS या तो सिर छुपाके सुन लेते हैं या फिर मुस्कुरा कर टाल जाते हैं

लेकिन जो IAS  बिहार में काम कर रहे हैं उनके लिए भी यह बात सुखद नहीं है गलत कुछ लोग करते हैं बदनाम पूरी कौम होती है नीतीश का वक्तव्य 2007 में था 10 साल बीत चुके हैं कहते हैं 10 सालों में दशा बदल जाती है बिहार में वास्तव में दशा बदली है और फाइलों पर गलत होने की एक बड़ी  बानगी बिहार के सामने है।अब दबाव भी देखिए  या तो भ्रष्ट रहने दीजिए नही ंतो केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेज दीजिए। आईएएस एसोसिएशन जिस दबाव को बना रहा है उससे एक बात तो साफ है की भ्रष्ट आचरण के बाद भी अपने उपर संरक्षण का आवरण खोजने का काम तेजी से चल रहा है  बात आचरण की ही है कि जिस राज्य में 10 से ज्यादा आईएएस जेल जा चुके हैं वहंा किस तरह के संरक्षण की लाडाई होनी चाहिए खुद को अभिजात्य वर्ग का प्रमुख मामने वाले लोगों को अपनी अनैतिक हरकतों पर शर्मिन्दगी कम और कानून के कार्रवाई को लेकर आक्रोश ज्यादा है... विचार बिहार को करना है,, संधर्ष बिहार को ही करना है



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