Breaking News
By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Tue ,21 Feb 2017 03:02:39 pm |
समाचार नाऊ ब्यूरो - प्रधानमंत्री जी को ये भी उत्तर देना होगा कि जिन किसानों को कीमत नहीं मिली, बिजाई प्रभावित हो गई नोटबंदी के बाद में, उऩको किस तरह की राहत दी है। एक बड़ा मजाक उऩ्होनें देश के किसानों के साथ किया, 60 दिन का ब्याज की छूट देने का जहां कि मांग ये थी किसान की और हमारी भी यही थी कि किसानों का कर्जा माफ करे, ये मांग 8 नबंवर से पहले की मांग थी । 8 नबंवर के बाद जो हमारी इकॉनॉमि पर आघात लगा है, चोट पहुंची है, खास तौर पर ग्रामीण इकॉनॉमि को किसान, खेत मजदूर, उनको किसी तरह की राहत प्रधानमंत्री ने नहीं दी ।
एक विषय और है जिसमे सरकार की चुप्पी हैरंतमंद है, प्रधानमंत्री ने जो कारण बताए थे अब उस पर चुप है । 8 नबंवर के फैसले को अब 100 दिन हो चुके, आजतक ये नोट गिनती पूरी नहीं हुई कि कितना पैसा वापस आ गया, उसमें से कितना काला धन था, ये सवाल है। उन्होने बड़ा राष्ट्र के नाम संदेश दिया, एक बार नहीं, दो-दो बार दिया, पर उसके बाद चुप क्यों है ये उऩ्हें बताना चाहिए ।
पहले तो जो नकली नोट जो थे वो आकडें सरकार के है रिजर्व बैंक के है जो 400 करोड़ कुल था पर साढें 15 लाख खत्म किया 86.4 प्रतिशत पैसा भारतीय जनता का हालाकि 0.02 प्रतिशत और अब तो नकली नोट भारी तादाद मे छप रहे है पाकिस्तान से जुड़े संगठन हैं। बंगाल मे पकड़े जा रहे हैं, बांग्लादेश से आ रहे हैं, क्या जो ये फैसले प्रधानमंत्री ने किए थे जल्दबाजी में किए है ? हम जानते है कि प्रधानमंत्री की मानसिकता और व्यक्तिव ऐसा है कि वो कभी विन्रमता से गलती के लिए माफी नहीं मागेंगे, पर सवाल जरूर उठते हैं, इसलिए हम आपके माध्यम से प्रधानमंत्री से यह सवाल कर रहे हैं ।
चुनाव भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस अपने सिंध्दातों और नीतियों पर लडती है राज्य के और राष्ट्र के विषयों पर हम चुनाव लड़ते हैं, हम चुनाव के दौरान हम न कोई ऐसी बात कहते हैं, और न स्वीकार करते है कि जिससे हमारे समाज के अंदर कमजोरी आए सामाजिक एकता कमजोर हो, प्रधानमंत्री को दुरुस्तगी करनी चाहिए । चुनाव आयोग को अपना काम करना चाहिए । चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले कह दिया था कि इस तरह का प्रचार कोई स्वीकार नहीं करेगें, अब चुनाव आय़ोग को करना चाहिए और प्रधानमंत्री के इस कथन पर उऩको सोचना चाहिए । हम सोचते है कि इलेक्शन कमीशन को अपना काम खुद करना चाहिए ।
प्रधानमंत्री की कथनी और करनी मे फर्क है । वो सबका साथ और सबका विकास तो देश में नहीं हो रहा । देश के प्रधानमंत्री है 2014 से, सबका साथ और सबका विकास बोल रहे हैं, और सबसे झगड़ा कर रहे हैं, सबको अपमानित करते हैं, सबसे टकराव करते हैं, राजनीतिक विरोधियों को धमकातें हैं, सरकारी एंजेसीज का दुरूपयोग करते हैं, ये अजीब तरीका है, सबका साथ और सबका विकास लाने का। सबसे तो लड़ते हैं, चेहरे पर हमेशा गुस्सा रहते है, वाणी मे कटुता रहती है, जब बोलते हैं, अशुभ बात बोलते हैं, बोलें अच्छी बात, बोलें त्योहार की बात, बोलें मुस्कुरा कर बोलें । लोग कहते है उनको नौकरी चाहिए, उनको जीवन चाहिए, उनको खुशहाली चाहिए, ये कहते है कब्रिस्तान और समशान मैं तो आपत्ति करता हूं इस बात पर ।
मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने कोई गलत बात नहीं की हैं, समानता की उन्होंने बस इसकी अपील की है, इसके उत्तर में श्री आनंद शर्मा ने कहा कि ये कोई बालक नहीं है जो इस बात को न समझे कि इसका कारण क्या है, समय क्या है? धुर्वीकरण करना इनका पुराना काम है इनकी सोच और विचार वहीं है मुखौटा लगा लेते है । भारत के संविधान के अंदर है चाहे आर्टिकल 14 है समानता का आर्टिकल 19 है फ्रीडम और एक्स्प्रेशेन का Right to Life and Liberty, Article 21 ये तो संविधान निर्माताओं ने भारत के नागरिको को बराबरी का दर्जा दिया है उसी का सबको सम्मान करना चाहिए, विशेष तौर पर जब आप संविधान की शपथ लेकर बड़े पद को ग्रहण करते है मैं अपने विवेक से कह सकता हूं कि ये बौखलाहट है, निश्चित पराजय है, हड़बडाकर उन्होंने ऐसा प्रयास किया है ।
शर्मा ने पुन कहा कि हम गांधी जी की सोच, उनके विचार और सिध्दांतों का सम्मान करें और जहां तक गांधी जी के हत्यारे का सवाल है उनके विचारों को सामने लाना है, मैं नहीं समझता कि ऐसी कोई चीज है या ऐसा कोई वक्तय है, उस समय कि ट्रायल में जिस पर कभी प्रश्नचिन्ह उठें हो, भारत की अदालतों के रिकॉर्ड में सभी चीजें मिल जाएगी ।
All rights reserved © 2013-2026 samacharnow.com
Developed by Mania Group Of Technology.