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सीएनटी, एसपीटी एक्ट में बदलाव से आदिवासियों, पिछड़ों व दलितों का होगा भला - रघुवर दास

By ?????? ??? ?????? | Publish Date: Mon ,07 Nov 2016 07:11:53 am |


समाचार नाउ ब्यूरो जमशेदपुर: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि सीएनटी, एसपीटी एक्ट में आंशिक बदलाव से आदिवासियों, पिछड़ों व दलितों का भला होगा. इन्हें लूटनेवालों की दुकानदारी बंद हो जायेगी. इस कारण लुटेरों में बौखलाहट है. मुख्यमंत्री शनिवार को जमशेदपुर में सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर प्रांगण में प्रभात खबर से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा : सीएनटी- एसपीटी एक्ट का लाभ उठा कर जो लोग आदिवासियों, पिछड़ों और दलितों की जमीन-जायदाद लूटते थे, उस पर रोक लग जायेगी. ऐसे लोगों से पूरे प्रदेश को सचेत रहने की जरूरत है. 

 

फैलायी जा रही अफवाह : मुख्यमंत्री ने कहा : पहले यह जान लें कि कानून में बदलाव क्या हो रहा है और उससे आदिवासियों का भला होगा या नुकसान. सीएनटी व एसपीटी एक्ट में जो बदलाव हो रहा है, उसे लेकर गलत अफवाह फैलायी जा रही है. इस बदलाव से आदिवासियों, पिछड़ों व दलितों को हर स्तर पर लाभ ही होगा. कोई उनकी जमीन नहीं ले सकेगा.
 

कांग्रेस व झामुमो ने मिल कर 1996 में बदला सीएनटी-एसपीटी एक्ट : मुख्यमंत्री ने कहा : 1996 में सीएनटी व एसपीटी एक्ट में बदलाव हुआ था. उस समय कांग्रेस का शासन था और झामुमो उसके साथ थी. तब यह तय हुआ था कि माइनिंग, सरकारी कार्य के लिए जमीन का हस्तांतरण हो सकता है. इसके लिए ग्रामसभा से मंजूरी ली जा सकती है. उस वक्त कांग्रेस या झारखंड नामधारी पार्टियों ने चुप्पी साधे रखा. लेकिन अभी बेहतरी के लिए बदलाव किया जा रहा है, तो उनकी बौखलाहट बढ़ रही है.
 

बुनियादी सुविधाओं से रोकने की कोशिश : रघुवर दास ने कहा : बदलाव के जरिये गरीब, दलित, पिछड़े और आदिवासियों के गांवों तक बिजली, पानी व सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचायी जायेगी, जिसे रोकने की कोशिश की जा रही है. कांग्रेस और झारखंड नामधारी दल गांवों को पिछड़ा रखना चाहते हैं, ताकि उनकी दुकानदारी आसानी से चलती रहे. पर अब जनता जागरूक हो चुकी है और उनकी बातों में आनेवाली नहीं है.
 

जनता तक अपनी बात पहुंचायेंगे : मुख्यमंत्री ने कहा : हम बदलाव की बातों को जनता तक पहुंचायेंगे, ताकि वे किसी के बहकावे में न आकर खुद सही-गलत का निर्णय ले सकें. संगठन से लेकर सरकार तक के लोगों को इस काम में लगाया जायेगा. सरकार की मंशा क्या है, यह जब स्पष्ट रूप से लोग जान जायेंगे, तो जरूर हमारी सरकार की तारीफ करेंगे.

भूमि अधिग्रहण कानून 2003 के तहत रैयतधारी आदिवासी, दलित, पिछड़े की जमीन अगर सरकारी काम या किसी विकास योजना के लिए लेनी होती थी, तो दो साल लग जाते थे और लोगों को पैसे तक नहीं मिल पाते थे. एक्ट में बदलाव से चार माह में ग्राम सभा की मंजूरी भी मिल जायेगी और लोगों को पैसे भी मिल जायेंगे. पिछले 70 साल में झारखंड के गांवों के 68 लाख में से सिर्फ 38 लाख घरों तक बिजली पहुंच सकी है. जो अब तक का तौर-तरीका रहा है, उससे क्या 30 लाख घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए सरकार को 50 साल और लगाना चाहिए? 2018 तक हमारा लक्ष्य है कि हर घर में बिजली पहुंचे और 257 सब स्टेशन बनाये जायें, जिसके लिए यह बदलाव कारगर भूमिका निभायेगा.

 

बदलाव व फायदे- 2

सीएनटी व एसपीटी एक्ट के तहत रैयतधारी द्वारा अगर कृषि भूमि को गैर कृषि कार्य में लगा दिया जाता था, तो वह नियमित नहीं हो पाती थी. मसलन, अगर कोई आदिवासी, दलित या पिछड़ा व्यक्ति कृषि की जमीन पर दुकान बनाता था, तो जमीन की प्रकृति बदल जाती थी और उसे वाजिब नहीं कहा जा सकता था. लेकिन अभी के प्रावधान से जिस भी रैयतदार ने अपनी कृषि योग्य जमीन की प्रकृति बदल दी है, वह नियमित हो जायेगी और आनेवाले दिनों में अगर वह कुछ बदलाव करना चाहता है, तो कर सकता है. इसके लिए सरकार को मामूली लगान देना पड़ेगा. इससे आदिवासी, पिछड़ा या दलित व्यक्ति अगर खेती नहीं कर पाता है, तो अपनी जमीन पर कोई और काम कर सकता है, जो पहले नहीं होता था. यह कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त भी हो जायेगा.

अब तक किसी भी सरकार ने ऐसी हिम्मत नहीं की थी. सीएनटी व एसपीटी एक्ट में आदिवासी, पिछड़ा, दलित की जमीन कोई भी व्यक्ति या सरकार 30 साल का मुआवजा देने के बाद खरीद लेता था और अपने नाम कर लेता था. लेकिन, इस बदलाव से यह संभव नहीं हो सकेगा. मुआवजा देकर अब कोई भी किसी की जमीन छीन नहीं सकता है.



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