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By समाचार नाऊ ब्यूरो | Publish Date: Sat ,08 Apr 2017 12:04:22 pm |
समाचार नाऊ ब्यूरो भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने खाताधारकों से अकाउंट में न्यूनतम राशि नहीं रखने पर अधिक शुल्क तो वसूलना शुरू कर ही दिया है, इसके साथ ही अब कस्टमर्स को चेक बुक और लॉकर के लिए भी अधिक पैसे देने होंगे। इसमें स्टेट बैंक के साथ हाल ही में विलय हुए छह बैंकों के ग्राहक भी शामिल हैं। एसबीआई के विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क बढ़ाने के निर्णय के बाद अन्य बैंक भी ऐसा करने को प्रोत्साहित हो सकते हैं। इससे देश भर में ग्राहक प्रभावित होंगे।
ये शुल्क पांच पूर्व असोसिएट बैंक और भारतीय महिला बैंक के ग्राहकों पर भी लागू होंगे। इन बैंकों का स्टैट बैंक में विलय 1 अप्रैल से प्रभाव में आ गया। विलय के बाद एसबीआई ग्राहकों की संख्या बढ़कर 37 करोड़ हो गई है।
स्टेट बैंक ने लॉकर किराया भी बढ़ा दिया है। साथ ही एक साल में लॉकर के उपयोग की संख्या भी कम कर दी है। 12 बार उपयोग करने के बाद ग्राहकों को 100 रुपए के साथ सर्विस टैक्स देना होगा। चेक बुक के मामले में चालू खाताधारकों को एक वित्त वर्ष में 50 चेक मुफ्त मिलेंगे। उसके बाद उन्हें चेक के प्रति पन्ने के लिए 3 रुपए देने होंगे। इस प्रकार, 25 पन्नों वाले चेक बुक के लिए उन्हें 75 रुपए के साथ सर्विस टैक्स भी देना होगा।
अब मासिक आधार पर 6 महानगरों में एसबीआई की शाखा में औसतन 5,000 रुपए रखने होंगे। वहीं शहरी और अर्ध-शहरी शाखाओं के लिए क्रमश: न्यूनतम राशि सीमा 3,000 रुपये और 2,000 रुपए रखी गई है। ग्रामीण शाखाओं के मामले में न्यूनतम राशि 1,000 रुपए तय की गई है।
एसबीआई की वेबसाइट के अनुसार एसबीआई के बचत खाताधारकों को मासिक आधार पर न्यूनतम राशि को अपने खाते में रखना होगा। ऐसा नहीं होने पर उन्हें 20 रुपए (ग्रामीण शाखा) से 100 रुपए (महानगर) देने होंगे। बैंक में 31 मार्च तक बिना चेक बुक वाले बचत खाते में 500 रुपए और चेक बुक की सुविधा के साथ 1,000 रुपए रखने की आवश्यकता थी। हालांकि सुरभि, मूल बचत खाता और प्रधानमंत्री जनधन योजना खातों में यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।
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